- डीआईजी और एसपी की मौजूदगी में उज्जैन में हुई बलवा ड्रिल: जवानों को दिया प्रशिक्षण, सिखाई गई भीड़ प्रबंधन तकनीक
- सूर्य के मीन राशि में प्रवेश से लगेगा मलमास, विवाह-गृहप्रवेश पर एक माह की रोक; इसी अवधि में आएंगे चैत्र नवरात्र
- वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन के बाद सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए: रजत शेषनाग मुकुट और मुण्डमाला में सजे बाबा महाकाल, श्रद्धालुओं ने किए दर्शन!
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: रजत चंद्र और गुलाब माला से सजे बाबा, स्वस्ति वाचन के बाद खुले चांदी के पट!
- धुलेंडी के साथ उज्जैन में शुरू हुआ गणगौर पर्व, महिलाएं 16 दिनों तक करेंगी पूजा; राजस्थान से मंगवाई जाती हैं ड्रेस
रुद्रसागर में साफ पानी रखने की कवायद…:नृसिंह घाट पर पंपिंग स्टेशन व फिल्टर प्लांट बनेगा
महाकाल-रुद्रसागर प्रोजेक्ट में स्मार्ट सिटी ने रुद्रसागर को साफ पानी से भरा रखने का बंदोबस्त करने के लिए नृसिंहघाट पर पंपिंग स्टेशन और फिल्टर प्लांट बनाना तय किया है। महाकाल मंदिर के पीछे रुद्रसागर के किनारे स्मार्ट सिटी श्रद्धालुओं के सुविधाएं, सौंदर्यीकरण, पर्यटन रुचि के काम करा रही है। इसी क्रम में रुद्रसागर का विकास भी होना है। इसे गहरा करने, किनारों पर घाट बनाने, रुद्रसागर में साफ पानी रखने के इंतजाम किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में रुद्रसागर का हाइड्रोलॉजिकल सर्वे भी कराया जा रहा है। इसे पूरी तरह साफ और गहरा कर इसमें साफ पानी का बंदोबस्त किया जाना है। इसके लिए स्मार्ट सिटी कंपनी ने साफ पानी का बंदोबस्त शिप्रा से करने की योजना बनाई है। इसके तहत नृसिंहघाट पर पंपिंग स्टेशन व फिल्टर प्लांट बनाया जाएगा। यहां से पाइप से शिप्रा का पानी रुद्रसागर में डाला जा सकेगा। यह पाइप लाइन दोतरफा होगी। रुद्रसागर में बारिश में आया अतिरिक्त पानी इसी पाइप लाइन से शिप्रा में भी छोड़ा जा सकेगा। स्मार्ट सिटी ने इस काम के लिए टेंडर निकाले थे। इसमें सात कंपनियों ने भाग लिया है। अधीक्षण यंत्री धर्मेंद्र वर्मा के अनुसार 75 लाख-75लाख के दो ग्रुप में टेंडर बुलाए थे। इन्हें दो दिन बाद खोला जाएगा।
दो तरफा फायदा होगा
1 नृसिंहघाट पर पंपिंग स्टेशन और फिल्टर प्लांट बनने से रुद्रसागर में हमेशा साफ पानी रखा जा सकेगा। बारिश के बाद यदि रुद्रसागर में पानी की कमी होती है तो शिप्रा से नया साफ पानी इसमें डाला जा सकेगा।
2 फिल्टर प्लांट बन जाने से रुद्रसागर के अलावा महाकाल मंदिर क्षेत्र में अलग जलप्रदाय व्यवस्था की जा सकेगी। इसे महाकाल मंदिर की जलप्रदाय व्यवस्था से भी जोड़ सकते हैं। सिंहस्थ में भी इसका उपयोग होगा।